Monday, September 1, 2014

11. Megh - Sumara - मेघ : उनकी सुमड़ा उपजाति की उत्पति और इतिवृत

(यह वर्णन 8वीं शताब्दी के प्रारंभ का है)
सिंध का राजा दाहिर संभवतः ब्राह्मण ही था। उसका एक भाई चन्द्र थाजो बौद्ध भिक्षु था। लोगों ने उससे विनती की। उसने राज संभाला और जो धर्म परिवर्तन कर चुके थे। उन्हें फिर बौद्ध धर्म में लाया। उसके बाद दाहिर का पुत्र राज गद्दी पर बैठा। वह ब्राह्मण धर्म को मनाता था। यह समय सिंध में बड़ी धार्मिक उथल पुथल का था।

उसके बाद सुमड़ा नाम का राज वंश सिंध में राज्यासीन होता है। यह मेघों के जातीय समूह का एक उप समूह मात्र है। मूल जाति मेघ ही है। वर्तमान समय में सुमरा लोगों का भारत की पश्चिमी सीमा में बसे मेघों में बाहुल्य है। किसी समय इन्होंने थार में ही अपना राजा चुना था। ऐसा अरबी पुस्तकों में लिखा है।

"Amongst a megh clan sumara emerged as local dynasty of Sivi or Sibistan after the death of Kasim, and they not only fought against Mohammedans but also fought against brahmanical (hindus) forces. In between Kasim and Sumara Arab ruled the Sindh"

सुमरा या सुमड़ा लोगों के बारे में अरबी इतिहासकारों ने कई बातें लिखी हैं। उनको सम्मा लोगों ने पराजित किया। सम्मा लोग मुसलमान हो गए और जाम उपाधि या नाम धारण कर लिया। जडेजाजाम आदि लोग मुसलमान हो गए। सुमड़ा लोग परंपरागत रूप से बुद्ध अनुयायी थे। उन पर हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों के द्वारा कहर ढाया गया। वे थार के रेगिस्तान में आ बसे।

आज के पाकिस्तान और भारत के सीमावर्ती बाड़मेर आदि व गुजरात के कुछ भागों में मेघों की आबादी में इनकी बहुतायत है।जो लोग मुसलमान बने वे अपने को पर्शियन मूल का और जो हिन्दू बने वे यदु के मूल का बता कर अपने पूर्ववर्ती पुरखों के बुद्धोपासक होने के तथ्य पर पर्दा मात्र डालते हैं।
मेघ सुमड़ा ऐसा करने में विफल रहे। वे आज भी मेघ या मेघवाल ही कहे जाते हैं। बौद्ध धर्म से अनभिज्ञ कुछ इतिहासकारों और लेखकों ने उन्हें इस्माइली सिद्ध करने के असफल प्रयत्न किये। कुछ ने परमार/भाटी राजपूतों में मिलाने का यत्न किया।परन्तु इब्न बतूता के वर्णन से स्पष्ट है कि ये राजपूत नहीं हो सकते। उनके खाने-पीनेविवाह और अन्य सरोकारों से वे मुसलमान भी नहीं हो सकते।

अरबी इतिहास से स्पस्ट है कि वे अपने को हिन्दू या काफ़िर भी नहीं मानते थे। वे काफ़िर (हिन्दूके अधीन रहने में अपनी अप्रतिष्ठा मानते थेइसलिए वे कभी हिन्दू नहीं हो सकते।

चूँकि जब इनका पराभव हुआ तब तक बुद्ध को विष्णु बना दिया गया था और इसमाईलियों ने भी हज़रत अली को विष्णु का अवतार बना दिया था। अतः बुद्ध अनुयायी सुमड़ों की धार्मिक आस्था का भी वही हश्र हुआ। न मुसलमान रह सके न हिन्दू।



जातीय समूह के तौर पर सुमरा मेघों की उपजाति हैधार्मिक तौर पर वे बौध थे.(Sumara is a sub clan of Megh ethnic group. By faith they were Buddhist.) सुमरा लोगों की जातीयता को लेकर कई तरह के प्रश्न हैं। जिस पर फिर कभी। (Reference: Ethnography of Afghanistan Arab History, Ibn batuta.

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  1. 11. मेघ : उनकी सुमड़ा उपजाति की उत्पति और इतिवृत-

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