Monday, September 1, 2014

12. Meghs in Indian subcontinent - मेघ : एशिया महाद्वीप में

From- "Descriptive Ethnology, volume-1”, by Robert Gordon Latham

(R.G.Latham की यह पुस्तक सन 1859 में प्रकाशित हुई थी। उसने मेघों के वर्णन में अपनी बात को महान इतिहासकारभाषाविद् और विभिन्न भाषाओँ के जानकर शलाका पुरुष Julius Klaproth को उद्धृत किया है। Julius Klaproth ने एशिया के इतिहासप्रजातियोंभाषाओं आदि पर बहुत लिखाजो आज भी प्रकाश-स्तम्भ की तरह है। उनका जन्म सन 1783 में हुआ था और 1835 में देहावसान हुआ था। उनके द्वारा ethnology पर लिखी पुस्तक जर्मन भाषा में है। अन्य भाषा में मुझे पढ़ने को नहीं मिलीअन्यथा 17वीं शताब्दी के पहले के मेघों के जीवन पर और अधिक विवरण लिखताजो Julius Klaproth ने किया है। उपर्युक्त वर्णन R. G. Latham की पुस्तक से हैजो अंग्रेजी भाषा में पहली बार 1859 में लन्दन से प्रकाशित हुई।)

जैसा मैंने पहले स्पष्ट कियाउन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए Robert Gordon Latham द्वारा उनकी पुस्तक "Descriptive Ethnology", volume-1, की कुछ टिप्पणियों को सन्दर्भ हेतु यहाँ दे रहा हूँ।

उक्त पुस्तक में मेघों का वर्णन Ostiak ट्राइब के प्रसंग में किया है। कदाचित मेघ ट्राइब को इस जातीय समूह में माना हो। जो बाद में हंगरी में जा बसे। Ostiak लोगों के पड़ोस की जातियों में मेघों का वर्णन है। Latham, R.G. writes- " MEGH is a political division. But besides the political division, there is religious one. The use of the same consecrated spot, or the same priest, is also a band of union; that the two divisions thus formed by no means necessarily coincide." Page-456,

स्पष्टः उसने मेघों को उसने प्राचीन समय से ही एक राजनीतिक विभाग माना है। मेघों और Ostiak लोगों के आपसी संबंधों पर भी इसमें वर्णन है। मेघों के धर्म के बारे में वह लिखता है :

"The priest is a 'Shaman', i.e. priest, sacrificant, sorcerer, prophet, and medicine-man at one, capable of working himself into real or mock frenzies, fond of the sound of the drum" page-456,

मेघों का धर्म "शमनबताया गया है। उस समय उस प्रदेश में बौद्धों को समन या समनीय कहा जाता था। समन या शमन शब्द 'श्रमणशब्द से निकला हैजो बौध भिक्षु यानि बुद्ध अनुयायी के लिए उस क्षेत्र में प्रयुक्त होता था। अरबअफ़ग़ानिस्तान के इतिहास और सिंध के इतिहास में भी ऐसा ही है।

Julius Klaproth को उद्धृत करते हुए वह वहां के मेघों के कुछ विशिष्ठ नामों या समूहों का जिक्र करता है :

The names of the following tribes, or Megh, are from Klaproth:
1. Luhung MEGH, 2. Waghu MEGH, 3. Tormiogn MEGH, 4. Pyhm MEGH, 5. Agon MEGH, 6. Endl agon MEGH, 7. Ay Agon MEGH, 8. Lokatsh MEGH, 9. Palakh MEGH, 10. Salam MEGH, 11. Tahsen MEGH.

इनके इन विभिन्न नामकरणों के बारे में भी उसमें उल्लेख है। वह आगे लिखता है:

"Members of the same tribe, whether large or small consider themselves as relations, even where the common ancestor is unknown, and where the evidence of consanguinity is wholly wanting. Nevertheless, the feeling of consanguity. Sometimes real, sometimes conventional, is the fundamental principle of the union. The rich, of which there are few, help the poor, who are many. There is much that can change hands" page-455

मेघों के आपसी सद्भाव और सौहाद्रिय पर यह टिपण्णी अभी तक चरितार्थ होती है। वह उनके सामाजिक रीति-रिवाजों और सरोकारों पर भी टिप्पणी करता है। देखें:

"The practice of interring the weapons and accoutrements of the deceased alongwith the corpse, common in so many rude Countries, is common amongst Ostiak.......... plurity of wives the country is too poor, brothers marry the widows of brothers. Two brothers, however, may not marry two sisters." Page-457

Reference: R.G. Latham- Descriptive Ethnology, volume-1, Eastern and Northern Asia-Europe, London.

1 comment:

  1. 12. मेघ : एशिया महाद्वीप में
    प्रसिद्ध भाषाविद व मानव शास्त्री जे.क्लापरोथ व्वा रॉबर्ट गोर्डन लाथम ने मेघों को पूर्वी व उतरी एशिया महाद्वीप का एक राजनैतिक और सामाजिक घटक माना। उनके धर्म को शमनिय यानि बुद्धानुयाई। Indian ethnonogy में भी मेघों के बारे में ऐसा ही विवरण है।

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