Monday, September 1, 2014

21. Col. Evam (1857 विद्रोह)


1857 का विद्रोह और थार पारकर के अछूतों का योगदान

सन 1862 में यहाँ पर नगर पालिका का गठन हुआ। इस कसबे में वस्त्रों की कताई-बुनाई का व्यवसाय कभी प्रसिद्धि पर था। जिसमें वहां के मेंगवार परिवार कई पीढ़ियों से इस हुनर के सिद्धहस्त कारीगर बहुतायत से इस आजीविका में संलग्न थे। जब सन 1862 में नगर पालिका का गठन हुआ तब इस कसबे की जनसंख्या लगभग 2355 आंकी गयी थी जिनमें 539 मुसलमान और 1816 हिन्दू थे। हिन्दुओं में सर्वाधिक मेंगवारकोलीलोहान और ब्राह्मण थे।

कपास पर अत्यधिक टेक्सबुनाई पर टेक्सव्यापर पर चुंगी का अत्यधिक भारखेती-बाड़ी पर टेक्स आदि ने जनता में असंतोष को बढ़ा दिया था। अतः जब देश के अन्य भागों में 1857 का विद्रोह हुआ तो यहाँ भी चिन्गारी लग गयी और मेंगावारों सहित यहाँ की प्रजा राणा के पास गयी। राणा उस समय अंग्रेजों का कारिन्दा ही था परन्तु उसने प्रजा का साथ देने का निश्चय किया और राज के विरुद्ध खुले रूप में विद्रोह का सूत्रपात हो गया। जिसमें वहां के मेंगवारों ने बढ़-चढ़ कर इस विद्रोह में हिस्सा लिया। पहली बात तो यह थी कि उनका कताई-बुनाई के पर अत्यधिक टेक्स भार होने से जीना दूभर थादूसरा कृषि आधारित उनके जीवन पर भी दोहरी मार पड़ रही थी। उनकी आबादी भी ज्यादा थी।

इस विद्रोह में वे बुरी तरह से दब गए। अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबाने हेतु मई 1859 में कर्नल इवाम के नेतृत्व में नगर पारकर सैन्य टुकड़ी भेजी। जिसका मुकाबला वहां की प्रजा ने बड़ी बहादुरी से किया। परन्तुअंततः कर्नल ईवाम यह विद्रोह दबाने में सफल हुआ। वहां के कई विद्रोही परिवारों ने वर्तमान राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर के इलाकों में शरण ली। पाकिस्तान से सटे बाड़मेर इलाके में बसे मेघवाल और कोली परिवारों में उस विद्रोह के कई शरणापन्न परिवारों के वंशधर है। मई 1859 में कर्नल ईवाम द्वारा दबाया गया यह विद्रोह पूरी तरह से उस समय शांत नहीं हुआ। कई मेंगवारकोली और ब्राह्मण वहां से कूच कर कर गए थे। उन्होंने पुनः जून 1859 में संगठित होकर नगर पारकर पर धावा बोल दिया। इस समय राणा और उसका मंत्री अखाजी पकडे गये। उन पर सिंध के कोर्ट में केस चला।

मैं आपका ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि 1857 के विद्रोह में अछूत समुदायों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी लेकिन समाज में उनका स्थान ऊँचा न होने के कारण उसे रेखांकित नहीं किया गया.

(यह जानकारी कर्नल ईवाम के गुप्त पत्राचार से।)

No comments:

Post a Comment