Monday, September 1, 2014

25. Bambi and Meghwal (JN Bhattacharya)


राजस्थान मेंविशेषकर मारवाड़ में बेगारी करने वाली जातियों को बाम्भी या भाम्भी कहा जाता रहा है। जिनमें अधिकांशतः मेघवाल होते थे। इस प्रकार से यह शब्द मेघवाल जाति के लिए प्रयुक्त होने लगा। गांव भाम्भी इसी जाति से होता था। मारवाड़ में चमार और मोची के साथ ही बाम्भी भी 18वीं-19वीं शती में किसी न किसी तरह से चमड़े के कार्यों में संलग्न थे। भले ही वे अलग जाति में परिगणित हों पर इस जाति के लोगों में कताई-बुनाई और गांव के खेती-बाड़ी और अन्य बेगारी के कार्यों के अलावा चर्मकारी भी प्रचलित थी। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में लिखित पुस्तक "Hindu Castes and Sects" में इसका सदर्भ -

"Besides the Chamars and Muchis there are some other leather-working classes in Rajputana having the following names:
1. Bambi 2. Jatia 3.Sargara.
In Bikaner the Chamars are called Balai. The Bambi are worker in leather, weavers, and village servants. The Jatias, like Muchis of Bengal, eat the flesh of dead animals. The Sargaras are cultivators and drum beaters. -----Some Muchis regularly beg from door to door ----------religious sect"
See Reference: "Hindu castes and Sects" by Jogendra Nath Bhattacharya, Thacker, Spink and Co, 1896, page-268.



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