Monday, September 1, 2014

27. KP Jaiswal and Megh rulers


केप़ी जायसवाल (काशी प्रसाद जायसवालभारत के अग्रणी इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता थे। उनकी एक पुस्तक का हिंदी अनुवाद "भारत का अन्धकार युगीन इतिहास" 1932 में नागरी प्रचारणी सभाकाशी द्वारा प्रकाशित किया गया। इस पुस्तक में प्राचीन भारत में मेघों की स्थिति का वर्णन देखें-

"76. वाकाटकों के समय में कोसला में एक के बाद एक इस प्रकार नौ शासक हुए थेपर भागवत के अनुसार इनकी संख्या सात ही है। ये लोग "मेघकहलाते थे। संभव है कि ये लोग उड़ीसा तथा कलिंग के उन्हीं चेदियों के वंशज हों जो खारवेल के वंशधर थे और जो अपने साम्राज्य-कल में "महामेघकहलाते थे। अपनी सात या नौ पीढ़ियों के कारण ये लोग मूलतः विन्ध्यशक्ति के समय तकजब कि आंध्र पर विजय प्राप्त की गई थीअथवा उससे भी और पहले भारशिवों के समय तक जा पहुँचते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार कोसला प्रदेश के सात विभाग थे (सप्त कोसला)। पुराणों में कहा गया है कि ये शासक बहुत शक्तिशाली और बहुत बुद्धिमान थे। गुप्तों के समय में मेघ लोग हमें फिर कौशाम्बी के शासकों या गवर्नरों के रूप में मिलते हैं जहाँ उनके दो शिलालेख मिले हैं।"--- पृष्ठ-161

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसके बाद भी उनके कई शिलालेख और सिक्के मिलते रहे हैं परन्तु उन पर गंभीरता पूर्वक अध्ययन होना अभी भी अपेक्षित है।

No comments:

Post a Comment