Monday, September 1, 2014

29. Megh : Progenitors of Sisodiya

राजस्थान के उदयपुर आदि भूभाग को मेवाड कहा जाता था। जहाँ गुहिलगहलोतों का आधिपत्य था। महाराणा प्रताप इसी वंश से थे। गहलोतों की एक प्रमुख शाखा सिसोदिया है। सिसोदियों की उत्पत्ति को लेकर कई प्रकार की किंवदंतियां हैं। इनके भाटों या रावों की बहियों में भी इनकी उत्पत्ति के बारे में अलग अलग बातें हैं। मेघों की परंपरा गहलोतों का निकास मेघों से मानती हैं। कई बार ऐसी बातें सुनने के बाद भी मुझे इसका कोई प्रमाण नहीं मिला तो मैंने यही माना कि यह मेघवालों की कोरी कल्पना मात्र हैसच्चाई नहीं। परन्तु जब मैंने इस तथ्य को जाना कि प्राचीन काल में मेघों को मेक या मोकर या मोकरी भी कहा जाता था और कुछ इतिहासकार गुहिलों या गहलोतों का संबध उससे जोड़ते हैं तो इस परिप्रेक्ष्य में पुनः संधान करने पर पाया कि कुछ मध्यकालीन बहियों में सिसोदियों (गहलोतोंकी उत्पत्ति के बारे में उन्हें बाम्भणी का जाया कहा गया है (मेघवाल औरत से पैदा हुआ न कि बामणि अर्थात ब्राह्मण औरत से पैदा कहा गया है)। मेघों की परंपरा की साक्षी "सोनिगरो की बातनामक बही में उल्लेखित निम्न पद्यांश से होती है-

"सिसोदिया बाम्भणी*रातवड़ कियो तेल रो।
गोदारा जाटणी रामांगलिया थोरिण रा।।"

सन्दर्भ के लिए मूल बही भी देखे (pp 359b-360) जिसका उल्लेख "A Descriptive catalogue of Bardic and Historical MSS" के page-84 पर किया गया है एवं उपर्युक्त पद्यांश ज्यों का त्यों दिया गया है।
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*मेघवालों को बाम्भी और मेघवाल औरत को बांभण कहना राजस्थान में आम प्रचलित रहा है एवं अभी भी देहातों में ये सम्बोधानार्थ शब्द प्रयुक्त होते हैं। एक औखाणा (कहावतप्रचलित है- 'सौ बामणि और एक बाम्भणी को जिमाना बराबर है।'- अर्थात सौ ब्राहमण औरतों को भोजन कराने से जितना पुण्य मिलता हैउतना एक बाम्भण यानि मेघवाल औरत को जिमाने से ही प्राप्त हो जाता है)

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