Monday, September 1, 2014

4. Meghs -Social and religious position - मेघ : सामाजिक और धार्मिक स्थिति

मेघवाल मूलतः वैदिक (हिन्दूनहीं थे। यह कई साक्ष्यों से स्पष्ट है। परन्तु आज वह हिन्दू धर्म की एक अधम जात में शुमार है। हिन्दू धर्म में खपने या खपाने में बहुत लम्बी अवधि व्यतीत हुई। बौद्ध धर्म के पतन के बाद उन्हें भी जातीय संस्तरण में कहीं न कहीं खपना था और अपना वजूद बनाना था। अतः कभी वे वैष्णव या हिन्दू और कभी मुसलमानों में गिने जाते रहे। जब जन संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का रास्ता तय हुआ तो साधू-संतों की भीड़ बढ़ी और उन्हें हिन्दू धर्म में माने जाने हेतु सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर पुर जोर प्रयत्न किये जिसके परिणाम स्वरूप आज ये हिन्दू माने जाते हैं वे खुद भी मानते हैं। परन्तु 17वीं-18वीं शताब्दी तक जैसलमेर रियासत में वे मुसलमानों की नफरी में ही शुमार किये जाते थे। राजपुताना गजेटियर-1879, वॉल्यूम में जैसलमेर रियासत के castes, clans, and tribes के शीर्षक में हिन्दू जातियों के नाम और उनकी जनसंख्या के बाद मुसलमान जनसंख्या का वर्णन है। मेघवाल आदि जातियों को मुसलमानों में वर्णित किया गया है।

(सन्दर्भ के लिए देखें--"The mohammadans of Jesalmer, comprising somewhat more than a third of the whole population, are 76 classes: Bauries, Bhils, Gururas, Megwals, and Khabruko(sweeper) from the lowest castes in the country." (Reference as above, page-176)



1 comment:

  1. 4. मेघ : सामाजिक और धार्मिक स्थिति- विगत शताब्दियों में मेघों की धार्मिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति थी। किन्हीं जगहों पर हिन्दू तो किन्हीं जगहों पर मुसलमानों की नफरी में शुमार किये जाते रहे। जाते रहे। मुसलमान-बाहुल्य जैसलमेर में उनकी स्थिति का पता इस बात से चलता है कि उनकी जाति को मुसलमानों की आबादी के साथ गिना।

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