Monday, September 1, 2014

48. Marwar: A country of mhars i.e Megh


प्राचीन काल में कई भौगोलिक क्षेत्रों के नाम वहां निवास करने वाले जातीय समूहों या लोगों के नाम से प्रचलित हुएइसमें वर्तमान राजस्थान के कई भू-भाग हैंजो वहां निवास करने वाले लोगों के नाम से जाने जाते हैं। इनमें "मारवाड़नाम से विख्यात भूभाग भी एक है।
"मारवाड़का नाम यहाँ निवास करने वाले म्हार लोगों के कारण ही पड़ा। म्हारों के कारण म्हार वाडमारवाड़ आदि नाम प्रचलन में आया। यहाँ राजपूतों के आधिपत्य से पूर्व यह भूभाग म्हारों का निवास स्थान था और नाग जातीय लोगों से निवासित था। मल्लमालवम्हारमेघ एक ही जातीय समूह से माने गए हैं।
म्हारमेरमेवमल्लआदि जन समूहों से मारवाड़मेर वाडमेवाड़/मेवातमल्लानी आदि राजस्थान के प्राचीन भूखण्डों के नाम हैं।
विगत कुछ शताब्दियों से मारवाड़ का अर्थ 'country of death' कह कर प्रचलित किया गयाजो पूर्णतः गलत है। कुछ लोगों ने मरू भूमि और मरुस्थल नाम भी दिए परन्तु म्हार शब्द इतना दृढ़ हो गया कि कुछ भी नया नाम देने पर भी लोग इसे मारवाड़ ही पुकारते हैं।
अगर मार और वाड़ शब्द से उत्पत्ति माने तो भी "संस्कृतमें "मारशब्द नहीं मिलता है। "मारशब्द पालि का तकनीकी शब्द है जिसका निश्चित अर्थ पालि में है। इस प्रकार से यह भूभाग प्राचीन कल में बौद्ध धर्म की शरणस्थली रहा हैयह प्रमाणित होता है। राजपूतों की सत्ता हो जाने के बाद भी वे मारवाड़ शब्द से पीछा नहीं छुड़ा सके।
और भी कई तथ्य हैं। यहाँ R. G. Latham की पुस्तक में मारवाड़ शब्द पर की गयी टिप्पणी दी जा रही है-
"Marwar: From-----like all countries--------. It is Marwar, Marusthan, or Marudesh- not 'the country of death' ( as has been argued ), but the country of mhars (mairs)" page- 386-387, Descriptive Ethnology, volume-2, edition-1859, London.



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