Monday, September 1, 2014

53. Megh : Their ethnicity and TRADE in Himachal pradesh - British period


प्रायः सभी पुरातत्ववेत्ताओं ने यह उद्घाटित किया है कि मेघ एक प्राचीन राजनीतिक और सांस्कृतिक घटक रहा है। उनकी जातीयता (ethnicity) को लेकर भी प्रायः सभी विद्वान उन्हें अनार्य प्रजाति (non-aryan race) की कोल शाखा से सम्बद्ध करते हुए उनका खाका खींचते हैं। इसलिए मेघों को अपने प्राचीन इतिहास अन्वेषण में उस इतिहास को भी अन्वेषित करना एवं परखना जरूरी हैक्योंकि जब उनकी मान्यता अनुसार मेघ कोलेरियन ग्रुप में समाहित मान लिए गएतो उन्होंने अपने विवरण या विश्लेषण में मेघों का अलग से उल्लेख करना वांछित नहीं समझा। यह दृश्य जम्मू-कश्मीरहिमाचलपंजाब के साथ ही पूरे पश्चिम-उत्तरीय हिमालय में बसे मेघों के साथ घटित हुआ। मारवाड़ में उन्हें म्हार या मेर मान कर इतिहास में दर्ज किया। जिसका मैंने एक-दो पोस्ट में उद्धरण पहले दिया है। गुजरात आदि प्रदेशों में उन्हें मोकरि या काठी आदि मानते हुए दर्ज किया। अतः जो मेघों के इतिहास को पुनर्जीवित करना चाहते हैंउन्हें इन सभी सम्बंधित गवेषणाओं का पुनर्विवेचन करना चाहिए। यह जरूरी हैनहीं तो आप एक समग्र इतिहास की रचना नहीं कर सकेंगे।
ब्रिटिश काल में हिमाचल प्रदेश में स्थानीय व्यापार में मेघों का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसका उल्लेख कई रचनाओं में हैपरन्तु उन्हें कोल मानते हुए कोल लिखते हुए ही रेखांकित किया गया है। यह ट्रेंड अभी भी जारी है। इस सन्दर्भ में अभी की एक पुस्तक में वर्णित इस दृष्टिकोण के ट्रेंड का निरंतर जारी रहने का भी स्पष्टीकरण होता है-

'Trading Castes and Communities'

"During British the mountainous regions to the north of Punjab was inhabited by a great variety of people. There have been migrations of people from time to time for number of reasons. -------------. Other important reasons were trade and politics."
"For ascertaining the role of these various ethnic groups in the history of trade and commerce of the region now forming Himachal Pradesh during the British time we shall have to examine the ethnological and occupation structure of the people. During those days business was in the hands of two types of traders. The local traders and the outer traders from outside. There were four main cultural strata. The first two were represented by native folk. The Kolis who formed nearly 30 percent of population, were regarded as low caste. They appeared under various castes names such as Koli, Hali, Sippi, Chamar, Dumma, Barwala, MEGH, Drain, Rehra, Sarara, Lohar, Batwal, Dagi, Chanal, etc. They are known to have come from the original stock of the Kolarian (Kol) race which once inhabited the whole Western Himalaya. They formed the lowest socio-economic strata of hill society. -----------------. These professional gilds formed an integral part of the village community, these distinctions were merely occupational and in general came within a broad category as Koli. Agriculture, animal husbandry and artisans' work led to trade and commerce."

(Reference: "Traditional Trade and Trading Centres in Himachal Pradesh" By: Poonam Minhas. Indus Publishing, 1998, pages 59-60.)

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