Monday, September 1, 2014

6. Meghs in Barmer - मेघ : बाड़मेर में उनकी स्थिति


जोधपुर रियासत में बाड़मेर का एरिया मालानी कहा जाता था। बाड़मेर का या नाम बालरिख के कारण पड़ा था। बाल रिख की यह तपस्या भूमि थी। बाल रिख को दन्त कथाओं में मेघवाल बताया जाता है। सत्य क्या हैपता नहीं। उसकी धूणी/आश्रम वहां था। वह धूणी बाद में शैवायतों के कब्जे में चली गयी। यह क्षेत्र पाकिस्तान से लगा है। मेघवालों की यहाँ सघन बस्तियां थी और आज भी पायी जाती हैं

17वीं-18वीं शताब्दी में उनका सामुदायिक जीवन कैसा थाइसके बारे में रियासत काल के गजेटियर में निम्न वर्णन मिलता है-

"Megwals-There are three classes of Meghwals, they eat together, but do not intermarry :

The first are locally known as Bambhis, the same caste as Chamars in the North Western Provinces; they perform the general work of the village, look after travellers, and get, in return the skin of all unclaimed dead animals; on occasions of marriages, food, and from the heads of villages, a certain quantity of grain at harvest time, they are also workers in leather, and weavers. The bodies of those who are followers of Ramdeo (a Holly man whose shrine is now worshipped at Ramdeora near Pokran), and Pabu, another Holly man who formally lived in the neighborhood, are buried and bodies of worshippers of Vishnu are burned. THE SECOND ARE JATIAS, THE REGARS of the North West Provinces : these men cultivate, but their special occupation is dyeing and working in untanned leather; they eat the flesh of dead animals. THE THIRD ARE CALLED BANGRAS; they make cloth from thread, and also cultivate. The same remarks as to burning after death apply to the Jatias and Bangaras." (Page- 281, Rajputana Gazetteer, published in 1879 in the description of Jodhpur Riyasat- Malani.)



2 comments:

  1. 6. मेघ : बाड़मेर में उनकी स्थिति
    इस इलाके में 19वीं शदी में किये गए सर्वेक्षण में मेघों की सामाजिक स्थिति का विवरण। उतर-पश्चिम भारत के चमारों के सम तुल्य साथ ही जटियों को भी मेघों का ही एक अलग वर्ग वर्णित किया। सैतुल्य

    ReplyDelete
  2. 6. मेघ : बाड़मेर में उनकी स्थिति
    इस इलाके में 19वीं शदी में किये गए सर्वेक्षण में मेघों की सामाजिक स्थिति का विवरण। उतर-पश्चिम भारत के चमारों के सम तुल्य साथ ही जटियों को भी मेघों का ही एक अलग वर्ग वर्णित किया। सैतुल्य

    ReplyDelete