Saturday, September 20, 2014

75. Megh : Myth of Basak nag

जम्मू-कश्मीर में और तक़रीबन समस्त भारत में बासक नाग या वासुकी नाग की कथाएं प्रचलित रही हैं, जिनसे मेघों का प्रत्यक्ष सम्बन्ध रहा है। इस पर किसी अन्य पोस्ट पर लिखा जायेगा। यहाँ इस बात पर ध्यान अपेक्षित है कि जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर बासक नाग की पूजा की जाती रही है। बासक नाग को नागों का पहला राजा भी कहा जाता है और किसी मेघ को उसका पहला शिष्य या चेला माना गया है। हिस्ट्री ऑफ़ चमार डायनेस्टी के अध्याय 6 के फुटनोट में भी इसका जिक्र किया गया है। जम्मू-कश्मीर के राजा कलस के समय भद्रवाह में यह परंपरा बनी हुई थी। उसका समय 7वीं शताब्दी के आस-पास ठहराया जाता है। हालाँकि आज-कल मेघ निम्न स्तर पर माने जाते हैं परन्तु उस समय तक उनकी सामाजिक और आध्यात्मिक स्थिति निम्न नहीं थी।

"---- The interesting myth of Basak Nag is not only regarded as the presiding deity of Bhadrawah, but as the first Raja of the valley. In Sanskrit literature he occurs under the name of Vasuki and often figures as the king of the Nagas. The attendant of the Naga Shrine are a Brahman pujari and a Chela or disciple in Sanskrit called Cheta who belong to agricultural caste of the Meghs. They are a low caste tribe in the outer hills. The temple of Basaki Naga at Bheja Uparla has two chelas, one of whom is a Megh and the other a Thakur. According to popular notions the Chela is a more important personage than the Pujari, for it is he, who is supposed to prophesy through his mouth. The state of feigned or real ecstasy, in which such predictions are uttered, is indicated by the word nachna, "to dance." The Chela is very prudent in the wording of his prophesies so that it never can be said that they have not come true. The same institution is found in connection with Devi worship." (H. P. H. S., pp 617-618) & R.T. vol.1, Book-7, p-315 cited in The History of Chamar Dynasty (from 6th century A.D. to 12th centuru A.D.) By Raj Kumar page-228

1 comment:

  1. मेघवंश:इतिहास और संस्कृति भाग दो में मेघवालों के मृत्यु उपरांत किये जाने वाले क्रिया-कलापों में चेला बनाने की 'संकोढाल' विधि का पर प्रकाश डाला गया है, जिसमे बासक नाग ही पूज्य सर्वोच्च देव होता है। जम्मू-कश्मीर की बासक नाग पूजा से मिलाता-जुलता ही रूप है, जिस पर सिद्धो और नाथों का स्पष्ट प्रभाव दिखता है।

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