Thursday, January 8, 2015

108. Myth of Megh Rikh and Meghvansh - मेघ रिख का मिथ और मेघवंश

Tararam Gautam with Bharat Bhushan
15 hrs


विष्णु पुराण और मेघ वंश- मेघवंश इतिहास और संस्कृति भाग एक में कौशल के मेघवंश पर कुछ विस्तार से लिखा गया था। और मेघ राजाओं की वन्शावलि भी दी गयी थी। जो लोग संस्कृत और हिंदी की जानकारी नहीं रखते है, परन्तु अंग्रेजी में रूचि रखते है। उनसे मेरा निवेदन है कि जो भाग एक में लिखा है। उसको विष्णु पुराण के अंग्रेजी अनुवाद से भी परख ले। जब यह स्थापित किया गया कि मेघवंश वस्त्र बुनने के कार्य से अलग जाति या समूह नहीं बना बल्कि अपनी अलग मान्यताओं से बना, जिसमें उनके जातीय समूह को एक वंश का अभिधान मिला तो ऐसा स्थापित करने के कई आधार रहे है फिर भी कुछ लोग उस पर उहाँ पोह कर रहे है। मेरी नजर में यह उनका बालपन ही है। जो न तो खुद ज्ञान संपन्न होना चाहते है और न ही दूसरों को होने देना चाहते है। खैर जो भी हो, यहाँ पर एच.एच. विल्सन द्वारा विष्णु पुराण के अंग्रेजी में किये गए अनुवाद से कुछ उक्तियाँ आपके ध्यानाकर्षण हेतु रख रहा हूँ। आप इस पर विचार करे। विल्सन महोदय ने इस अनुवाद के साथ कई पुराणों के सन्दर्भ भी दिए है और मेघवंश की उपस्थिति को प्रमाणिकता से स्थापित किया है। अनुवादित स्रोत का सन्दर्भ निम्न है-
"द विष्णु पुराण- ए सिस्टम ऑफ़ हिन्दू माइथोलॉजी एंड ट्रेडिशन ( ट्रांसलेटेड फ्रॉम द ओरिजिनल संस्कृत एंड इलस्ट्रेटेड बाई नोट्स डेरावीड चिफ़लि फ्रॉम अदर पुरान्स)"
by H. H. Wilson
Volume. 4
London, Trinket & co.
Publication: 1868


विल्सन के अनुवाद में पेज संख्या 216 में लिखा गया वाक्यांश निम्न है-
"The three copies of the Vayu read Komala, and call the kings the Meghas, “more strong than sapient"
"कोमलाम तु राजानो भविस्यन्ति महाबला:
मेघा इति समाख्यता बुद्धिमंतो न वै च तु ।।"
" The Bhagavata agrees with our text.“ The vayu says, of the Naishadhas, or kings of Nishadha, that they were, all, of the race of Nala: नलवंशप्रसुता | The Bhagavata adds two other races, seven Andhras (oide supra, p. 199, note 4), and kings of Vaidi'lra; with the remark, that these were, all, contemporaries; being, as the commentator observes, petty or provincial rulers,— खंडमंडलेषु भूपा|
इसी पेज के फुट नोट में लिखा-
§ From the correction made in note 1], below, it comes out that the Meghas were ‘both strong and sapient.’ I]
The proper and more ancient form is Kosala,—with the dental sibilant; and, as “(and are frequently interchanged by careless scribes, there is no doubt that कोसलायम is the right word here. The Brahmananda puran hasकुशला yielding koshala
The correct reading, unquestionably, is that which I find, नवैव I The kings of Kosala are, thus, said to be nine in number..
और भी जगहों पर विवरण है, उसे देखिये। मेघों को कपड़े बुनने वाली कौम बताने के पीछे कोई प्रमाण नहीं है। मैंने cotton और वस्त्र उद्योगों पर जितनी प्राचीन सामग्री टटोली है। उसमे इसको कहीं पर भी नहीं बताया गया है। यह उनके पराभव के बाद की जीविका का साधन भर रहा है। मेघ शब्द वस्त्र बुनाई से नहीं बना। फिर भी कुछ लोग उस तरफ ज्यादा माथा पच्ची कर रहे है। उन्हें क्या कहा जाय?
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You, Rattan Gottra, Satish Bhagat and Aryia Bhagat like this.
Rattan Gottra People who do not understand are mentally conditioned otherwise.
14 hrs · Unlike · 2
Tararam Gautam जितना प्रमाण इस वंश के राज वंश से उत्पन्न होने से है उसका रति भर भी राजपूतों के राजवंश से उत्पन्न होने से नहीं है। फिर भी राजपूत आदि अपने को राज वंशीय मानते है और एक ओर मेघ लोग है जो स्थापित, पुष्ट और प्रमाणित राज वंश होने के बाद भी वस्त्र बुनने और रिखी मिथक से छुटकारा नहीं पाना चाहते। दुनिया की किसी भी प्राचीन से प्राचीन अभिलेख या पुस्तक में मेघों के समूह को इससे जोड़ा हुआ नहीं बताया गया। यह सिर्फ ब्राह्मण वादी व्यवस्था में स्थान प्राप्ति का प्रयत्न भर है, जो औधे मुंह गिर चूका है। हिन्दू ग्रंथों में मेघों को वाह्लिक/ बाह्य/ अछेप न जाने क्या क्या कहा गया है। विष्णु पूरण में उन्हें आंध्र भृत्यों के समकक्ष रखा गया है। कोसल मेवुनाका उत्थान शातकर्णी के समय हुआ। उस समय नागार्जुन का प्रभाव चारों ओर था। इसमे कोई संदेह नहीं कि मेघ लोग जो अपने को मेघ महाधर्म का अनुयायी कहते है, वह उसी सी निकली शाखा हो सकती है। ये बाते उनके आचार विचार और धार्मिक मान्यताओं से भी पुष्ट होती है।
आप दूसरा साहित्य नहीं देखेंगे और कूप मंडूक की तरह हिन्दू शास्त्रों के इर्द गिर्द ही घूमेंगे तो आप अपने बारे में सही अन्वेषण भी नहीं कर पाएंगे। एस मेरा मानना है।
14 hrs · Unlike · 2
Tararam Gautam दुनिया में कई बड़े बड़े वंश पतन और पराभव को प्राप्त हुए। यह कोई मेघों के साथ होने वाली अनोखी घटना नहीं है। पर अन्य कौमो ने अपना रास्ता बना लिया और जो इज्जत और गौरव के आयाम थे; उन पर अधिकार कर लिया। मेघ पराभव के बाद उसे एक एक कर छोड़ते गए। अगर कोई कौम सहस्रों वर्षो तक भी उठने का साहस नहीं बटोर पाती है तो उससे ज्यादा मरी हुई कौम किसी को भी नहीं कहा जा सकता है।
आज का समय मेघों के उत्थान का बनाना चाहिए परन्तु उनकी नींद नहीं खुलती है क्योंकि हिन्दू वादी मिथकीय लोरिया उन्हें मीठा मीठा एहसास दे देती है तो फिर वे उठकर सो जाते है। यही एक और बड़ी विडम्बना है।
13 hrs · Edited · Unlike · 1
Rattan Gottra They need the true study of PRE-ARYAN CULTURE.
13 hrs · Unlike · 3
Tararam Gautam Not only pre Aryan but also non- vedic and non brahmanical literature must attract their attention.
13 hrs · Unlike · 2
Tararam Gautam Bharat Bhushan pl add in HT with comments.
12 hrs · Unlike · 2
Tararam Gautam इसी पुराण में मेकल प्रदेश के राजाओं का भी जिक्र है। यह नर्बदा के पास का क्षेत्र है। मेकल शब्द वहां की पहाड़ी का है, जो वहां निवास करने वाले मेग लोगो के कारण पड़ा। ऐसा मत अलेक्षन्दर कन्निन्ग्हम महोदय आदि ने रखा था। मेकल के राजाओं को उन्होंने मेघ वंश से ही जोड़ा था। जिनसे बाद में गुजरात के कुछ राजपूत वंशों का उत्थान हुआ। यह सब अनुसंधानीय और विचारणीय है।
इसी सन्दर्भ का पेज 215 देखा जा सकता है।
12 hrs · Edited · Unlike · 1
Bharat Bhushan मेदियन साम्राज्य के तार कहाँ कहाँ जुडे हैं इसे भी देखने की आवश्यकता होगी. उस साम्राज्य का बिखराव भी कई दिशाओं मेँ हुआ होगा. वस्त्र बनाने का कार्य केवल मेघों ने ही किया होगा इसे अक्ल नहीं मानती. अधिक संभावना इस बात की है कि उनके किसी छोटे समूह ने यह कार्य किया हो, सीखा हो.पूरा का पूरा वंश एक ही व्यवसाय में रहा हो इसकी संभावना शून्य ही है.
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Bharat Bhushan आप सही कह रहे हैं कि सवालों के घेरे में आकर मेघ रिख का मिथ जवाब नहीं दे पाता. Tararam Gautam ji.
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Bharat Bhushan इसे ht मेँ ले जाऊंगा.

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