Sunday, July 12, 2015

126 - Inscriptions of Megh Kings - मेघ महाराजाओं के शिलालेख

पिछले समय में वैयाकरणिक यदि किसी शब्द में से एक मात्रा कम कर पाते थे तो उन्हें वैसी ही खुशी होती थी जैसे पुराने ज़माने में पुत्र उत्पन्न होने पर होती थी. इतिहासकारों के बारे में भी यह सच है. जब इतिहास से संबंधित कोई नया प्रमाण या आधिकारिक दस्तावेज़ मिल जाता है तो इतिहास लेखक को वैसा ही सुख मिलता है. ताराराम जी ने अपनी पुस्तक मेघवंश इतिहास और संस्कृति, भाग-1 के पृष्ठ 196 से 198 (फोटो नीचे दी गई हैं) तक में महाराजा भद्रमेघ और उनसे संबंधित शिलालेखों का उल्लेख किया था. संभवतः, आज ही उन्हें 1925 में प्रकाशित एपिग्राफिया इंडिका वाल्यूम 18, से नई सामग्री मिली है जो एक शिलालेख पर आधारित है. यह आपसे शेयर की जा रही है.






महाराजा भद्र मेघ का कोसम शिलालेख, जैसा कि एपिग्राफिया इंडिका के 1925 के अंक 18 में प्रकाशित हुआ। उसकी फ़ोटो नीचे पेस्ट की जा रही है। महाराजा भद्र मेघ मेघ वंश का एक प्रतापी महाराजा था, जिसने कौशाम्बी और बघेलखण्ड पर शासन किया था। मेघवंश इतिहास और संस्कृति भाग 1 में इस पर कुछ विशेष प्रकाश डाला गया है। उस पुस्तक में कोई शिलालेख नहीं दिए गए है। परंतु उल्लेख है। कृपया पुस्तक के सन्दर्भ से इस मूल शिलालेख को मिला कर विचार करे।
सन्दर्भ: Epigraphia Indica Vol.18 pp 158 and onward.






कोसम शिलालेख: iii शिलालेख महाराजा भद्र मेघ का व ii महाराजा शिव मेघ से सम्बंधित है। इन दोनों महाराजाओं का संक्षिप्त वर्णन मेघवंश इतिहास और संस्कृति भाग 1 में यतस्ततः किया गया है!
     ये शिलालेख पहली बार एपिग्राफिया इंडिका के खंड 18 में प्रकाशित हुए परंतु अभी भी इतिहासकारों के अध्ययन में नहीं आये है। विस्तृत अध्ययन और शोध अपेक्षित है!

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