Saturday, May 6, 2017

169. सिरोही और विधान सभा में दोहरे मतदान की सुरक्षित सीटें

सिरोही और विधान सभा में दोहरे मतदान की सुरक्षित सीटें --

सिरोही एक छोटी रियासत/राज्य था, जो अंग्रेजों के अधीन था। सन् 1948 से पहले सिरोही राजपुताना एजेंसी के अधीन इसका प्रशासनिक कार्य होता था। सन् 1948 को सिरोही को राजपुताना एजेंसी से निकालकर 'इंडिया स्टेट ऐजेंसी' के अधीन कर दिया गया था। 8 नवंबर 1948 को भारत सरकार और सिरोही के बीच इकरार (agreement) हुआ और सिरोही भारत-सरकार के अधीन आ गया। जिसे 5 जनवरी 1949 को बोम्बे सरकार के अधीन कर दिया गया अर्थात वह बॉम्बे राज्य का हिस्सा हो गया। 25 जनवरी 1950 को आबू और देलवाड़ा तहसील को छोड़कर बाक़ी हिस्सा राजस्थान में मिला दिया। परंतु जब राजस्थान का पुनर्गठन किया गया तो 1 नवंबर 1956 को आबू और देलवाड़ा भी राजस्थान में मिला दिए गए। वर्तमान में सिरोही राजस्थान प्रान्त का एक जिला है।
सन् 1952 के चुनाव में सिरोही में तीन विधानसभा क्षेत्र ( भवरी, शिवगंज और सिरोही) थे यानि कि यहाँ से 3 विधायक चुने जाते थे। सन् 1952 के आम चुनाव में सिरोही की कोई भी सीट आरक्षित नहीं थी अर्थात यहाँ पर 1952 में कोई भी दोहरे मताधिकार की सीट नहीं थी।
राजस्थान के पुनर्गठन के बाद दूसरे आम चुनाव सन् 1957 में हुए, जिस में सिरोही जिले में विधानसभा के दो क्षेत्र- सिरोही और आबू तय किये गए। सिरोही सीट को दोहरे मताधिकार के तहत आरक्षित किया गया। इस प्रकार सिरोही जिले से 1957 को 3 विधायक चुने गए- दो सामान्य और एक आरक्षित।
सिरोही की सामान्य सीट पर मोहबत सिंह जीते और दोहरे मतदान हेतु आरक्षित सीट पर निर्दलीय श्री विरका जीता। कांग्रेस की ओर से श्री तेजाराम बहुत कम वोटों से हार गए।
सन् 1962 में दोहरी सीट प्रणाली खत्म कर सीटें सुरक्षित की गयी। सिरोही जिले में 3 विधानसभा क्षेत्र तय किये- सिरोही, पिंडवाड़ा और आबू। इस में सिरोही सीट आरक्षित रही। 1962 में सिरोही आरक्षित सीट पर कांग्रेस के धर्माराम विजयी हुए।
निष्कर्ष यह है कि सिरोही जिले में भी दोहरे मतदान की सीट रही है।
लोकसभा के लिए सिरोही को पाली में मिलाकर एक सीट रही। बाद में इसे पाली से निकाल कर जालोर सीट के साथ मिला दिया।
Reference:
Rajasthan District Gazetteer- Sirohi.

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