Sunday, May 7, 2017

171. पाली जिला और दोहरा मताधिकार..

पाली जिला और दोहरा मताधिकार..
राजस्थान के गठन से पूर्व पाली जोधपुर रियासत का हिस्सा था । जोधपुर (मारवाड़) के राजस्थान में विलय होने पर पाली भी राजस्थान का एक जिला बन गया।
सन् 1952 का विधानसभा का आम-चुनाव.
सन् 1952 के आम चुनाव में पाली जिले में 7 विधानसभा सीटें थी। ये सातों ही एकल मताधिकार और एक-विधायक चुनने वाली सीटें ही थी। इन सीटों में न तो कोई आरक्षित सीट थी और न इन में से किसी को दोहरा मताधिकार प्राप्त था। सन् 1952 में विधानसभा हेतु- बाली, बाली-देसूरी, सोजत-देसूरी, पाली-सोजत, सोजत, जेतारण पूर्व- सोजत पूर्व और जेतारण उत्तर-दक्षिण नाम से सूचित थी। 1952 में सभी जगह निर्दलीय जीते।
सन् 1957 का विधानसभा का आम-चुनाव.
सन् 1957 को राजस्थान के पुनर्गठन होने पर पाली जिले को 5 विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित किया गया- खारची, बाली, रायपुर, सोजत और पाली।
इस में खारची और बाली दोहरे मतदान की आरक्षित सीटें थी। खारची अनुसूचित जाति हेतु और बाली अनुसूचित जनजाति हेतु सुरक्षित रही।
सन् 1962 का विधानसभा का आम-चुनाव.
सन् 1962 में एक ही क्षेत्र से दो प्रत्याशी चुनने की प्रणाली खत्म कर दी गयी। पाली जिले में 5 की जगह 7 सीटें बनायीं गयी- पाली, खारची, देसूरी, बाली, सुमेरपुर, रायपुर और सोजत। जिस में देसूरी अनुसूचित जाति हेतु और सुमेरपुर अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित की गयी।
लोकसभा हेतु 1952 में पाली जिले को 2 सीटों में बांटा.. 1 नागोर-पाली, 2.- सिरोही-पाली। 1957 में ये पाली-जोधपुर और जोधपुर तथा 1962 में भी इसी नाम से रही.
(पाली में 1883 को आर्य समाज की स्थापना हुई थी)
सन् 1961 में पाली में अनुसूचित जातियों की जातिवार जनसंख्या निम्नानुसार थी...

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