Tuesday, May 9, 2017

172. जैसलमेर जिला और दोहरा मतदान


जैसलमेर जिला और दोहरा मतदान--
जिले में 1952 से 1962 विधानसभा हेतु एक ही सीट रही। जनसंख्या घनत्व के लिहाज से जैसलमेर सबसे कम आबादी वाला जिला रहा है। सन् 1952 में पूरे जिले की जनसंख्या के साथ जोधपुर जिले के कुछ भाग को मिलाकर जैसलमेर की एक विधानसभा सीट निर्धारित की गयी। सन् 1952 से लेकर 1962 तक एक ही प्रतिनिधि चुना जाता रहा। यहाँ कभी भी दोहरा मताधिकार यानि कि एक सीट पर दो प्रतिनिधि नहीं चुने गए।
लोकसभा हेतु भी सन् 1952 में जोधपुर और जैसलमेर का पूरा जिला मिला कर एक संसदीय प्रतिनिधि एकल मताधिकार से चुना गया। सन् 1957 को जैसलमेर का पूरा जिला और बाड़मेर का पूरा जिला मिलाकार उस में जोधपुर की पूरी फलौदी और शेरगढ़ तहसील और ओसियां तहसील के कुछ भाग को मिलकर एक सीट बनायीं गयी और एकल मताधिकार से एक ही साँसद चुना गया। 1962 में इस में बाड़मेर जैसलमेर तथा जोधपुर के ये 8 विधानसभा क्षेत्र मिलाकर एक सीट बनायीं गयी- सिवाना, पचपदरा, बाड़मेर, गुड़ामालानी, चौहटन, जैसलमेर, शेरगढ़ और फलोदी। सन् 1967 में फलोदी इससे अलग कर दिया और विधानसभा हेतु बनाया गया नया क्षेत्र- शिव इसमें जोड़ दिया।
स्पष्ट यह है कि बाड़मेर जैसलमेर में न तो कोई आरक्षित सीट रही और न यहाँ कभी दोहरा मताधिकार रहा।
(सन् 1950 में अनुसूचित जाति में शुमार गरु/ गारो/ गरुड़ा जाति के सामाजिक कार्यकर्ता श्री आत्माराम गर्ग द्वारा कांग्रेस संवेदित 'हरिजन सुधार मंडल' की स्थापना की गयी । जिसका 1952 में इसका नाम 'हरिजन प्रजनित जाति संघ' रख लिया गया। सन् 1954 में पुनः इसी संस्था का नाम बदलकर 'आल राजस्थान दलित वर्ग संघ' हो गया। इसके बाद यह संस्था 'जिला दलित वर्ग संघ' से जानी गयी।)
जैसलमेर में अनुसूचित जातियों में शुमार निम्न जातीयां निवास करती है, सन् 1961 की जनगणना के अनुसार जिले में उनकी जनसंख्या निम्नानुसार थी...
Reference:
Rajasthan District Gazetteer- Jaisalmer.


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