Friday, May 12, 2017

173. जालोर जिला और दोहरा मताधिकार..

जालोर जिला और दोहरा मताधिकार..
प्राचीन समय में जालोर में चंड प्रद्योत का राज्य था। ऐसा माना जाता है, जो भगवान बुद्ध और अजात शत्रु का समकालीन था। यहाँ पर उस समय कालमों का गण राज्य भी रहा। बाद में यह इलाका मौर्य और गुप्त राज्य के अधीन भी रहा। गुजरात्रा के अधीन, सिंध के अधीन...। राजपूतों के आविर्भाव होने पर यह राजपूतों के अधीन रहा। चौहान से पहले पंवार और बाद में राठौड़ । कुछ समय गेहलोतों के अधीन भी रहा।
आजादी से पहले यह जिला जोधपुर(मारवाड़ रियासत) का भाग था, जहां छोटी-छोटी जागीरे थी। जागीरदारी के विरोध में जयनारायण व्यास ने आंदोलन चलाया और 1940 में यहाँ पर भी मारवाड़ लोक परिषद का गठन किया। व्यास को जेल जाना पड़ा। बेगारी और जागीरदारी से पीड़ित जातियों ने, विशेषकर मेघों/मेघवालों, बाम्भी आदि जातियों से जितना समर्थन जयनारायण व्यास को जोधपुर के आसपास के गांवों में मिला, उनका इतना समर्थन जालोर में नहीं मिला, यह भी एक हकीकत है। रियासतें ख़त्म हो गयी। जागीरे ख़त्म हो गयी पर जालोर इलाक़ा राम राज्य की जद में ही रहा, इसलिये यहाँ की बेगार पीड़ित जातियां आज भी पिस रही है। इस पर फिर कभी...

लोकसभा के चुनाव 1952 से 1967
सन् 1952 से 1967 तक जालोर की लोकसभा सीट एकल मतदान की ही रही और सामान्य सीट रही अर्थात इस पर आरक्षण नहीं था। सन् 1952 में बाड़मेर-जालोर मिलाकर एक सीट बनायीं गयी। सन् 1957 में जालोर जिला ही अलग सीट रही, बाड़मेर का क्षेत्र अलग कर दिया। सन् 1962 में भी भी यही स्थिति रही। सन् 1967 में सिरोही और जालोर की निम्न तहसीलों को मिलाकर MP की एक सीट बनायीं गयी-- सिरोही, आबू, रेवदर, सांचोर, रानिवाङा, भीनमाल, आहोर और जालोर।

विधानसभा के चुनाव 1952
सन् 1952 में जालोर जिले में 5 विधानसभा के क्षेत्र थे। कोई दोहरे मतदान की सीट नहीं थी। सभी एकल मतदान की सामान्य सीटें थी, जो निम्न थी- जालोर-ए, जालोर-बी, जसवन्तपूरा, सांचोर और जसवंतपूरा-सांचोर। इन पर न तो दोहरा मताधिकार था और न आरक्षण। 
सन् 1957 में जालोर जिले में विधानसभा हेतु 5 की जगह निम्नलिखित 4 सीटें बनायीं गयी- सांचोर, जालोर, रानीवाड़ा और आहोर। इस में जालोर सीट दो सदस्यों वाली सीट यानि दोहरे मतदान की थी। एक सामान्य को चुनना और एक अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि को चुनना। जालोर विधानसभाकी दोनों सीटें(सामान्य और आरक्षित) राम राज्य परिषद के प्रत्याशियों ने जीती।
सन् 1962 में दोहरी सीट या दोहरे मतदान की जगह सीटें रिजर्व की गयी और जालोर में पुन 4 की जगह 5 सीटें तय की गयी, जो सांचोर, रानीवाड़ा, भीनमाल, जालोर और आहोर थी। इस में जालोर रिजर्व पर कांग्रेस जीती।
सन् 1967 में यही 5 सीटें रही। जालोर sc सीट पर स्वतंत्र पार्टी का उम्मीदवार जीता और बाद में कांग्रेस में मिल गया। उसकी मृत्यु होने पर दिनाक 4/11/68 को उप चुनाव हुए, जिस में कांग्रेस का प्रत्याशी जीता।
कुल मिलाकर तथ्य यह है कि इस जिले में दोहरी सीट या दोहरा मताधिकार रहा है और राजस्थान बनने से लेकर कोई न कोई आरक्षित सीट रही है।
जिले में सन् 1961 में निम्नलिखित अनुसूचित जातियां निवास करती है जिनकी सन् 1961 जनगणना के अनुसार निम्न जनसंख्या रही है-
Reference:
Rajasthan District Gazetteers- Jalore


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